Motivation Story -The Two Minutes Rule

Motivation Story – The Two Minutes Rule

Motivation Story in Hindi-The Two Minutes Rule

“The Two Minutes Rule”

ज़िन्दगी मैं लायेगा बड़ा बदलाव !

यह Motivation Story The Two Minutes Rule series है, हमारी आदतों के बारें में, हमारी आज ज़िन्दगी जो भी है, वो हमारी आदतों का परिणाम है | लेकिन होता यह हे, जब हम अच्छी आदत बनाने की कोशिश करते है, कुछ दिनों तक तो हम Motivate रहते हैं |

लेकिन कुछ दिनों बाद हमारा सारा Motivation खत्म हो जाता है, और हम जो आदत बनाना चाहते हैं, वो हम छोड़ देते है, बिल्कुल भूल जाते है, और वापस पुराने Routine पर आ जातें है | इस समस्या का एक निदान है, “The Two Minutes Rule”, जिसकी मदद से आप कोई भी अच्छी आदत बहुत आसानी से बना सकते हैं, बस आपको थोड़े से Will Power की जरूरत है|

बात होती है, जब आदतों की तो आदतें ही वो चीज़ है, जो हमारी ज़िन्दगी बनाती भी है, और बिगाड़ती भी हैं |

हर हफ्ते या पंद्रह दिन के बाद विवेक को लगता था, कि उसे अपने लाइफ में Change लाना चाहिए, वो Shape में आने के लिए Exerciser करना शुरु कर देता था, वो Books पढ़ता था, Meditation करने की कोशीश करता था, तो उसने Decide किया, कि वो इस अपनी Good habits बनायेगा, उसके कुछ दिन तो बहुत अच्छे जाते थे, वो बहुत Motivated और Exited feel करता था|

ये सारे काम बहुत आसानी से कर लेता था, उसे सब करने में मज़ा आता था, लेकिन कुछ दिन और बीतते हैं, और उसकी So-called नई आदतें अब उसे ज़रा भी रोमांचक नहीं लगती, उसका सारा Motivation खत्म हो चुका था, तो वो खुद से कहता है, कि कोई बात नहीं, मैं कल करूँगा, कल भी वो Motivated feel नहीं करता और फिर से खुद से कहता है, कल करूँगा और फिर वह कल-कल करता ही रहता हैं, और अपनी नई आदतों को भूल जाता है |

सिर्फ विवेक ही अकेला नहीं है, हमारे साथ भी ऐसा ही होता है, लेकिन ऐसा क्यों होता है ? क्यों नयी आदत बनाना इतना मुश्किल होता है ? क्योकि हम नयी आदत बनाने के लिए बड़े Target सेट करते हैं, तो हमारा Mind इसे स्वीकार नहीं करता, वो विरोध करता है, शुरू में तो हम बहुत Exited रहते हैं, और हमे सब कुछ आसान लगता है |

Motivation Story -The Two Minutes Rule

उदाहरण के लिए – यदि हमें एक घंटा जिम जाना उतना मुश्किल नहीं लगता क्योंकि आपके पास एक Initial Motivational Power होती है, जब हम Motivated होते हैं, तो हम खुद से बहुत ज्यादा मांग करने लगते हैं, हम सोचते है, की मैं कुछ दिन तक कुछ घंटे जिम गया हूँ, तो अब मैं डेली एक घंटे जिम जाऊंगा, लेकिन कुछ दिनों बाद हमारी New Habits बनने से पहले ही Initial Motivational Power खत्म हो जाता है, और वो एक घंटा हमें बहुत ज्यादा लगने लगता है, और फिर हम Jim skip करने लगते है, और धीरे-धीरे उसे बंद ही कर देते है, तो Motivation पर निर्भर होने की बजाय, हमें हमारी नई आदतों को Real Habit बनाने पर फोकस करना चाहिए |

नयी आदत पर फोकस करने का एक बहुत ही कारगर नियम है, और वह है !

“The Two Minutes Rule”

जब आप एक पूरी किताब पढ़ने की कोशीश करेंगे, एक घंटे ध्यान करने की कोशीश करोगे या पांच किलोमीटर भागने की कोशीश करोगे, तो आपको नयी आदतें बनाना मुश्किल हो जायेगा | ज्यादातर Task जिन्हें आप टालते हो, असल में मुश्किल नहीं होते, आप उन्हें इसलिए टालते हो, क्योंकि आप उन्हें मुश्किल बना लेते हो | The Two Minutes Rule से आप अपने दिमाग को यह मैसेज देते हो की जो आदत आप बनाना चाहते हो, वो मुश्किल नहीं हैं |

तो हमे करना यह है, कि अपने बड़ी आदतों का आपको टू मिनट्स का छोटा Version बनाना है, आपके Goals हालाँकि दो मिनट में Complete नहीं होंगे, लेकिन दो मिनट में आप आदत बनाना शुरू कर सकते हो, जब आप शुरू कर दोगे, इस पर बने रहना आपके लिए आसान होगा, यह बस टू मिनट्स की बात है |

उदाहरण के लिये – अगर आपको किताब पढ़ने की आदत डालना है, तो आप Two minutes habit इस्तेमाल करो और बस एक पेज ! सिर्फ एक, यानी केवल दो मिनट तक किताबों पड़ो, उसके बाद आप किताब रख दो, लेकिन कम से कम दो मिनट तक जरूर पड़ो, आपका लक्ष्य हो सकता है, कि आपको वो किताब Complete करनी है, पूरी पढ़नी है, लेकिन पहले आप शुरुआत तो करें, भले ही बहुत छोटी ही क्यों न हो |

अक्सर लोग सोचते हैं, और आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा, कि एक पेज पढ़ने से क्या होगा, वो इसलिए क्योकि आपकी नयी आदतें शुरुवात मैं इतनी मुश्किल नहीं होनी चाहिए, कि आप उससे नफरत करने लगें | आपने देखा होगा कि Dance में जो मुश्किल Steps होते हैं, उनकी Practice छोटे-छोटे हिस्सों में Break करके ही की जाती है, इसी तरह आप अपनी आदत को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ के, खुद को तैयार करना होगा, शुरू में ही बड़ी छलांग नहीं लगानी है, छोटी-छोटी छलांग लगाने की पहले Practice करनी है, 

वो कहते है ना Practice Makes Man Perfect.

जब आप डेली टू मिनट के लिए अपनी नयी आदतों को follow करना शुरू कर दोगे, तो इसके आसन होने की वजह से, आपका दिमाग इसे स्वीकार कर लेगा और आप इसे आसानी से रोज़ कर सकेंगे | Two Minutes Rule” के हिसाब से, आपको आपके लक्ष्य मैं समय-समय पर थोडा Improvisation करना चाहिए|

Motivation Story -The Two Minutes Rule

उदाहरण के लिए – यदि यह सोंचे की

मुझे लेखक बनना है ?

हो जाएगा ! मुझे बस एक सेंटेंस ही तो लिखना है |

मुझे फिट होना है ?

हो जायेगा, मुझे बस दो मिनट तक एक्सरसाइज ही तो करना है |

इस तरफ से Goals set करना आसान है, साथ ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भी, क्योंकि छोटे लक्ष्य ही आपसे वो काम करने की शुरुआत करवाएंगे, अगर आप एक वाक्य भी नहीं लिख सकते, तो आप एक किताब लिखने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं, अगर आप दो मिनट एक्सरसाइज भी नहीं कर सकते हैं, तो फिट होने की उम्मीद नहीं रख सकते |

लेकिन आपके सिर्फ एक वाक्य लिख लेना या फिर घर में दो मिनट वॉक कर लेने, दो मिनट व्यायाम कर लेना, कुछ ना करने से बहुत अच्छा है | और महत्वपूर्ण तो यह है, कि ऐसा करके आप आदत बना रहे हो, आखिर में आप जो एक Sentence लिख रहे हो, वो एक Paragraph बनेगा, Paragraph से एक Chapter बनेगा और Chapters एक Book.

मैं आपको मेरा एक उदाहरण देता हूँ कि मैंने कैसे Motivation Story – The Two Minutes Rule को अपनी लाइफ में Apply किया, काफी पहले मैं Books पढ़ने की Habit बनाना चाहता था, क्योंकि मुझे पता चल गया था, की लाइफ में आगे बढ़ना है तो नॉलेज बहुत जरूरी है और कामयाब लोगों ने अपनी लाइफ का एक्सपीरियंस लिख डाले उनके बुक्स मैं, तो मैने जोश में आकर कई बुक्स खरीदली, मैं कोशीश करता था, कि ज्यादा से ज्यादा बुक्स पड़ा जाया, इससे हुआ यह ये बोरिंग लगने लगा, मैने पढ़ना कम कर दिया और धीरे-धीरे बंद कर दिया |

तब मैने ध्यान दिया कि मैं खुद से बहुत हाई Expectation कर ली थी, और वही मुझे बुक्स पढ़ने से रोक रही थी, तो मैने डिसाइड किया की बुक्स तो पढ़ना है, भले ही एक पेज, मेने Daily एक पेज से, फिर से शुरुवात की, अब मेरा Goal बस एक पेज पढ़ने का था, अब कोई Inter Resistance नहीं था, एक पेज पड़ता था,

लेकिन बहुत ध्यान से और बहुत समझकर पड़ता था, एक पेज पड़ना बहुत आसान था, यह Habit बहुत आसानी से बन गयी, अब हुआ ये कि मैंने ज्यादा पढ़ना शुरू कर दिया, क्योंकि जब एक पेज पढ़ना आसान हो गया तो लगने लगा कि अब और पड़ना चाहिए, इस तरह से मैं कभी रुका नहीं, हाँ, कभी ऐसे दिन भी आए जब मेरा दिल एक पेज से ज्यादा पढ़ने का नहीं हुआ |

Motivation Story -The Two Minutes Rule

मगर जरूरी यह है कि आप Consistency बनाए रखो, तो मैने भले ही बस एक Page Daily पड़ा हो, लेकिन उन लोगों से ज्यादा ही पढ़ लिया था, जो यह कहते रह गए, की एक दिन मैं भी पढ़ना शुरु करूँगा, लेकिन उन्होंने कभी बुक खोली तक नहीं, अगर में दो मिनट भी नहीं पढ़ सकता, तो मैं अच्छा रीडर कैसे बनुगा | किसी भी Habit का Important Part उसकी शुरुआत होती है, ये नहीं कि आप काम कितनी अच्छी तरह या कितनी देर तक करते हों |

जरूरी यह है कि आप कितनी लगन और नियमितता से उसे करते हो | एक Sentence लिखना, बिल्कुल ना लिखने से बहुत अच्छा है, एक Page पढ़ना बिल्कुल न पड़ने से बहुत अच्छा है, दो मिनट घर में Walk करना, बिल्कुल Walk न करने से बहुत अच्छा है |

तो पहले तो आप दो मिनट से शुरुआत करनी है, बाद में आपको अपने प्रदर्शन में सुधार करने का काफी समय मिलेगा | नयी आदतें बनाना तब और आसान हो जाता है, जब आप के साथ एक पार्टनर हो, तो ये ब्लॉग अपने दोस्तों को पढाओ और उन्हें चैलेंज करो, “The Two Minutes Rule” के लिए | दोनों एक दूसरे को रिपोर्ट करो की आज आपने अपनी नयी आदत पर काम किया, या नहीं, ये याद रखें कि अगर आप कोई आदत ही नहीं है, तब उसे Improve कैसे करोगे, इसलिए बस शुरुआत करो, बाकी सब अपने आप हो जाएगा |

कम शब्दों मैं कहूँ तो, अगर आपको अपनी नयी आदत बनाना है, तो उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट दो, एक साथ सबकुछ करने की कोशिश मत करो | जो आपके लिए आसान होगा |

प्रिय पाठक, उम्मीद है, आपको “Motivation Story The Two Minutes Rule  प्रेरणादायक ब्लॉग पसंद आया होगा एवं इस लेख की जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी | 

कृपया कमेंट एवं शेयर अवश्य करें | धन्यवाद,

 

 

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