राम के बाद अयोध्या का क्या हुआ ?

Ram-Darbar

प्रचलित रामायण मैं जो आज तक हमने देखा, पढ़ा या सुना है, उसमे यहां तक की कहानी बताई गई है, लेकिन राम के बाद अयोध्या का क्या हुआ?

राम ने लक्ष्मण का परित्याग किया और लक्ष्मण ने सरयू नदी में जल समाधि ले ली इसके बाद राम ने भी जल समाधि लेने का निर्णय लिया और उनके साथ-साथ राम के आशीर्वाद के रूप में कई भक्तों को भी उनके साथ ही सरयू नदी में मोक्ष प्राप्ति का अवसर प्राप्त हुआ, रामानंद सागर की रामायण का यहां अंत हो जाता है,

 इसके बाद क्या हुआ इसकी जनमानस में अधिक जानकारी नहीं है, इस पर अधिक बात भी नहीं होती, राम के बाद अयोध्या का क्या हुआ? लव कुश के बाद सूर्यवंश की वंशावली कैसे और कहां तक आगे बढ़ी? राम का वह कौन सा वंश था जिसने महाभारत के युद्ध में कौरवों की सेना का साथ दिया था? क्या वर्तमान में राम का कोई वंश अस्तित्व में है या नहीं?

ऐसे तमाम सवालों के जवाब आपको मैं दूंगा

राम के बाद उनकी वंशावली कैसे आगे बड़ी यह जानने से पहले यह जानना जरूरी है,

कि राम के पूर्वज कौन थे ?

राम के बाद अयोध्या का क्या हुआ ?

ब्रह्मा जी के दस पुत्र थे, उनमे से एक पुत्र थे मरीचि, मरीचि के पुत्र हुए कश्यप, कश्यप के पुत्र हुए विवस्वान, जिनको हम उनके दूसरे नाम सूर्य से भी जानते हैं, यही कारण है कि राम के वंश को यहां से सूर्यवंशी भी कहा गया, उसके पश्यात विवस्वान के पुत्र हुए वैवस्वत मनु, और वैवस्वत मनु के पुत्र हुए इक्ष्वाकु, इक्ष्वाकु सूर्य वंश के पहले राजा माने जाते है, इसी कारण से इस वंश को इक्ष्वाकु वंश से भी जाना जाता है |

आगे इक्ष्वाकु के पुत्र हुए कुक्षी, कुक्षी के पुत्र हुए विकुक्षी, विकुक्षी के पुत्र हुए बाण और इस तरह वंशावली आगे बढ़ते-बढ़ते भगीरथ तक पहुंची, भागीरथ वही राजा है, जिन्होंने अपने तपोबल से माँ गंगा को पृथ्वी पर उतारा था, इसके बाद भागीरथ के पुत्र हुए ककुत्स्थ और ककुत्स्थ के पुत्र हुए इक्ष्वाकु वंश के बेहद पराक्रमी और प्रतापी राजा रघु,  चूँकि राजा रघु सूर्यवंश मैं बहुत पराक्रमी और प्रतापी थे इस वजह से इस कुल को आगे से रघुकुल के नाम से भी जाना गया |

इसके बाद रघु के पुत्र हुए प्रवृर्द्ध, प्रवृर्द्ध के पुत्र हुए शंखण और वंश आगे बढ़ता-बढ़ता राजा अज तक पहुंचा, अज के पुत्र हुए दशरथ और दशरथ के चार पुत्र हुए राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न | राम दशरथ के बड़े बेटे थे, इसके बाद अयोध्या के राजा बने राम |

राम कौन से क्रम के राजा थे, इसको लेकर इतिहासकारों में कई मतभेद है, एक पक्ष है जो मरीचि से यह गिनती शुरू करता है, और दूसरा पक्ष है, जो इक्ष्वाकु से यह  गिनती शुरु करता है, लेकिन सूर्यवंश मैं इक्ष्वाकु को पहला राजा माना जाता है, इसलिए यह कहा जा सकता है, कि राम सूर्यवंशीओं में ६३ वे क्रम के राजा थे, इसके बाद जैसा कि हम सब जानते हैं, की  उनके दो पुत्र हुए लव और कुश |      

पुराणों मैं राम के आलावा भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के दो-दो पुत्रो का उल्लेख मिलता है, भरत के दो पुत्रों के नाम थे तक्ष और पुष्कर, लक्ष्मण के पुत्र थे चित्रांगद और चंद्र केतु और शत्रुघ्न के पुत्र थे सुबाहु और शूरसेन जिसको शत्रुघाती के नाम से भी जाना जाता है |

वाल्मीकि रामायण में अयोध्या के विजय उल्लेखों में से हमें ज्ञात होता है, कि उनके छोटे भाई भरत ने अपने नाना कैकयराज अश्वपति के आमंत्रण और उनकी सहायता से गन्धर्वों के देश का गांधार को जीता था और अपने दो पुत्रों को वहां का शासक नियुक्त किया था, बाद में भरत के दोनों पुत्र तक्ष और पुष्कर ने वहां अपने-अपने नाम से तक्षशिला और पुष्करावती ऐसी दो नगरियाँ बसाई |

तक्षशिला वही है जिसके बारे में हमें जानकारी है, कि वर्तमान में यह पाकिस्तान के रावलपिंडी जिले में है, और प्राचीन भारत में यह नगरी शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में जानी जाती थी, यहां के प्रोफेसरों की सूची मैं एक प्रोफ़ेसर चाणक्य भी थे |

इस नगरी को भरत के पुत्र तक्ष ने बसाया था और भरत के दुसरे पुत्र की बसाई गई नगरी पुष्करावती अर्थात आज का पेशावर के नाम से जानते है | लक्ष्मण के ज्येष्ठ पुत्र चित्रागंद को अंगद के नाम से भी जाना जाता है उन्होंने करुपथ का राज्य संभाला जो आज हिमाचल प्रदेश मैं है |

और अन्गदिया नगरी बसाकर उसको अपनी राजधानी बनाई | लक्ष्मण के दुसरे पुत्र चंद्रकेतु ने मल्लदेश का राज्य संभाला जो आज उत्तर प्रदेश मैं गोरखपुर के आसपास है |

उन्होंने भी चंद्रचक्र नमक एक नगरी बसाकर उसे पानी राजधानी बनाई | शत्रुघ्न के ज्येष्ठ पुत्र सुबाहु ने आगे चलकर मथुरा का राज्य संभाला और उनके दूसरे पुत्र शत्रुघाती ने भेसला यानि आज के विदिशा का शासन संभाला | भरत लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न के पुत्रों के विषय में जान लेने के बाद एक बार फिर हम लौटते हैं |

लव कुश एवं राम की वंशावली की और यहां मैं आपको बता देना चाहता हूं कि राम की मृत्यु के साथ ही हिंदू धर्म के जो चार युग है, उसमें से त्रेता युग की समाप्ति होती है, और द्वापर युग का आरंभ होता है, हिंदू धर्म में युगों का वर्णन है, यह भी दिलचस्प है, राम ने पृथ्वी छोड़ने से पहले लव को उत्तर कौशल का राज्य दिया और कुश को दक्षिण कौशल का राज्य दिया | एतिहासिक तथ्यों के अनुसार लव ने लवपुरी शहर की स्थापना की, जो वर्तमान मैं पाकिस्तान का लाहौर शहर है, यहाँ आज भी एक किले मैं लव का एक मंदिर बना हुआ है |

लव के वंशज बाद मैं गुजरात भी गए और बाद मैं राजस्थान के मेवाड़ मैं आकर बस गए, जहां उन्होंने सिसोदिया राज्य की स्थापना की, शायद आज यही कारण है, कि मेवाड़ का राज्य प्रतीक आज भी सूर्य है, लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ, जिसमें बडगूजर, जयास और सिकरवार का वंश चला इसकी दूसरी शाखा सिसोदिया राजपूत वंश थी जिसमे बैसला और गहलोत (गुहिल) वंश के राजा हुए |

दूसरी और कुश ने कुशावती नगर की स्थापना की जो आज छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में है, कुश ने अपना राज्य पूर्व की और भी फैलाया और एक नागवंश की कन्या से विवाह किया | ऐसा मन जाता है की थाईलैंड के राजा उसी नागवंश के वंशज है शायद इन्ही कुछ कारणों से आज भी थाईलैंड के राजा को राम की उपाधि देने की प्रथा यथावत है |

कुश से कुशवाहा यानी कछवाहा राजपूतों का वंश चला इसके अलावा मौर्य, सैनी, शाक्य संप्रदाय की स्थापना भी कुश के वंश से हुई ऐसा माना जाता है| ऐसा माना जाता है की कुश की मृत्यु दुर्जय नाम के एक असुर से युद्ध करते हुए हुई थी, इसके अलावा ऐसा कहा जाता है, कि लव और कुश मै से कुश  का वंश ही आगे बढ़ा, इसी कारण इतिहास में भी कुश के वंशजों का ही सन्दर्भ मिलता है |

कुश पुत्र हुए अतिथि, अतिथि के पुत्र हुए निषद, निषद के पुत्र थे नल, नल के बाद नभ और इस तरह वंशावली आगे बढ़ते बढ़ते आ पहुंची महाभारत कल के राजा ब्र्हद्बल तक, इतिहास ब्र्हद्बल का जिक्र कुश की ५०वी पीड़ी के रूप में होता है, वे कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौरवों की ओर से युद्ध लड़ें थे और चक्रव्यूह मैं उनके और अभिमन्यु के बीच एक घमासान युद्ध होता है, जिसमें ब्र्हद्बल अभिमन्यु के प्राणघातक तीर से मृत्यु को प्राप्त होते हैं |

पुरानो मैं ब्र्हद्बल के बाद सुर्यवंश के अगले 30 सूर्यवंशी राजाओं का भी जिक्र मिलता है, जिसमें एक नाम राजा सिद्धार्थ यानि गौतम बुद्ध का भी है, इसका मतलब यह है, कि गौतम बुद्ध भी भगवान राम के ही वंशज थे, सूर्य वंश के अंतिम राजा के रूप में राजा सुमित्रा को जाना जाता है, जिनको नंद वंश के स्थापक महापद्मनंद ने हराकर अयोध्या को कब्जे में किया था, इस समय कुछ ईसा पूर्व 450 से 362 के आसपास का रहा होगा ऐसा माना जाता है | 

इस लेख में बताई गयी जानकारी के आधार पर आपने अपने ज्ञान में भी बहुत सी नई चीजों को जोड़ा होगा यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो कृपया दूसरे लोगों के साथ भी शेयर कीजिएगा | कमेंट के जरिए आपके सुझाव जरूर हम तक पहुंचाइए  , धन्यवाद |

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