युगों की रहस्यमय जानकारी – सतयुग द्वापर त्रेता और कलयुग

युगों से जुडी रहस्यमय जानकारी

युगों से जुडी रहस्यमय जानकारी – सतयुग, द्वापर, त्रेता और कलयुग

हिंदू शास्त्रों में युगों से जुडी रहस्यमय जानकारी वर्णन है, हम सब जानते हैं कि समय अनंत है, इसकी गिनती असंभव है, लेकिन फिर भी मनुष्य ने अपनी सहूलियत के हिसाब से समय को सेकंड, मिनट, घंटे, महीने, साल, दशक, शतक इस तरह की इकाईयों में बांट रखा है, बस इसी प्रकार हिंदू शास्त्रों में समस्त ब्रह्मांड का जो अलौकिक समय है, इसे नापने की सबसे बड़ी इकाई को युग कहा जाता है | 

हिंदू शास्त्रों में चार प्रकार के युगों का वर्णन है, यह युग क्रमश सत युग, त्रेता युग, द्वापर युग, और कलियुग हैं, सत युग अर्थात सत्य रूपी धर्म जब अपने चारो पग पर खड़ा था, त्रेता में धर्म के लड़खड़ाने की शुरुआत हुई और यह 3 पग पर आ गया, द्वापर में धर्मं दो पग पर खड़ा था और वर्तमान में यानी कलयुग में धर्म केवल एक पग पर ही खड़ा है |

युगों की रहस्यमय जानकारी – इस विषय में जानकारी देने से पहले मैं आपको वायु पुराण के संधर्भ से एक कहानी बताता हूँ  इसके बाद जब हम युगों से बारे जानेंगे तो आप उस जानकारी को आसानी से समझ पाएंगे |  इस कहानी की शुरुवात सुर्यवंश के राजा वैवस्वत मनु से शुरू होती है, वैवस्वत मनु के दस पुत्रों में से एक पुत्र थे शर्याति, शर्याति के पुत्र हुए रेव और रेव के पुत्र हुए रेवत, राजा रेवत का जिक्र इतिहास में बड़े ही पराक्रमी, दयालु, योद्धा एवं धर्मात्मा राजा के रूप मैं होता है, उन्होंने ही कुशस्थली राज्य की स्थापना की थी |

जिसे आज हम द्वारिका के नाम से जानते हैं, राजा रेवत की एक पुत्री थी रेवती, जो की अत्यंत ही सुशील एवं सुन्दर थी, जब वह विवाह के योग्य हो गयी, तो राजा रेवत ने उनके लिए योग्य वर की तलाश शुरू कर दी, राजा रेवत ने चारो दिशाओं मैं रेवती के लिए योग्य वर को ढूंढा मगर जब कोई योग्य वर नहीं मिला तो वह निराश होकर अपने कुलगुरु के पास गए, कुलगुरु ने उनकी व्यथा सुनकर कहा की चूँकि ब्रम्हा जी ने सृष्टी की रचना की है, इसलिए आप उन्ही के पास जाइए, वे इस विषय में आपकी जरुर मदद करेंगे |

राजा रेवत अपनी पुत्री के साथ एक लंबी यात्रा के बाद ब्रम्ह लोक में पहुंचे, जब वे वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा, कि ब्रम्हा जी गन्धर्वो के एक संगीत कार्यक्रम में मन्त्रमुग्ध हैं, इसलिए उन्होंने एक कार्यक्रम के खत्म होने के लिए कुछ दिनों तक वहां प्रतीक्षा की और जैसे ही कार्यक्रम खत्म हुआ, वे ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और अपनी व्यथा सुनाई |

राजा रेवत का दुःख सुनकर ब्रह्मा जी ने उनसे कहा, वत्स चिंता मत करो, पृथ्वी लोक पर भगवान विष्णु  ने श्रीकृष्ण अवतार में जन्म लिया है, और उनके बड़े भाई बलराम जी रेवती के लिए योग्य वर हैं, इतना सुनते ही बड़े आश्चर्य से राजा रेवत ने पूछा, कि मैं पृथ्वी लोक मैं सभी राजाओं और राजकुमारों के विषय में जानकारी रखता हूं, तो फिर ऐसा कैसे हो सकता है, कि मैं श्री कृष्णा और बलराम के विषय मैं नहीं जानता हूं |

तब ब्रह्माजी ने मुस्कुराते हुए कहा, कि ब्रम्ह लोक के समय के सामने पृथ्वी लोक सा समय बड़ी तेज गति से चलता है, आपके पृथ्वी लोक से प्रस्थान करने एवं यहां ब्रह्मलोक में समय बिताने के दौरान, वहां सतयुग एवं त्रेता युग बीत चुके हैं, और जब आप वहां पुनः लौटेंगे तो वहां द्वापर युग चल रहा होगा, इसी काल के दौरान आपकी जानकारी के तमाम राजाओं और राजकुमारों और उनकी कई पीढ़ियों ने मृत्यु को प्राप्त कर लिया है, और इसी काल के दौरान कई नए लोगों ने भी जन्म लिया है, इसलिए स्वाभाविक है, कि आप उनके विषय में जानकारी नहीं रखते हैं |

इस बात को सुनकर कई लोग इसे काल्पनिक बताते हुए इस पर उपहास करने की कोशिश भी करेंगे लेकिन मैं उन लोगों को google search कर इस पहलू पर वैज्ञानिक तर्क भी पढ़ने की सलाह दूंगा, कि जैसे-जैसे ऊपर की ओर जाते हैं, वैसे-वैसे ग्रेविटी का परिमाण है, वह भी घटता जाता है, यही कारण है कि हम जिन इकाई मैं समय को नापते है, उसकी गति भी घटती जाती है, और इसी वजह से चंद्रमा का एक दिन पृथ्वी के 28 दिनों के बराबर होता है |

कहानी में आगे बढ़ते हैं – ब्रह्मा जी की बात सुन कर जब राजा रेवत पृथ्वी लोक की और प्रस्थान कर रहे थे, तब ब्रह्माजी ने उनसे एक और बात कही, कि जिस प्रकार मनुष्य अपने दैनिक जीवन में निश्चित समय के कुछ खास गुणधर्म अनुभव करता है, उसी प्रकार युगों के भी कुछ विशेष गुण धर्म है, और इन गुण धर्मं के प्रभाव मनुष्य के कर्मों, उनके रंग रूप, उनके तौर-तरीके, उनके कद काठी इत्यादि मैं देखा जा सकता है |

इसके बाद राजा रेवत और रवती पृथ्वी पर लौटे तो यहां का नजारा देखकर दंग रह गए, यहां पहुंचते ही उन्होंने देखा कि यहां अब सतयुग जैसा कुछ भी नहीं है, लोगों का रंग रूप, कद काठी सब कुछ बदल चुका है, तत्पश्चात् वे बलराम जी के पास गए और उनको पूरी कहानी सुनाई |   

बलराम जी विवाह के लिए राज़ी तो हो गए, लेकिन राजा रेवत को एक चिंता सताए जा रही थी, चिंता की बात थी, कि सतयुग में मनुष्य की औसत लंबाई 32 फिट हुआ करती थी. लेकिन द्वापर में तो यह मात्र 11 फीट ही थी. इसलिए राजा रेवत को चिंता हुई कि चुकी बलराम का कद रेवती से काफी छोटा है, इसलिए यदि यह रिश्ता हुआ, तो लोग इस रिश्ते का मजाक उड़ाएंगे, तभी बलराम ने अपने हल से रेवती के कंधों को नीचे की ओर दबाया और रेवती का कद द्वापर युग की महिलाओं जितना हो गया और फिर दोनों का विवाह संपन्न हुआ|

बलराम जी के विवाह की इस कहानी के पश्चात मुझे उम्मीद है कि आपको युगों के बारे में साधारण  समझ आ गई होगी, अब हम इसे विस्तार से जानते हैं,

पहला युग है वह सत युग – इस युग की अवधि 17 लाख 28 हजार वर्ष होती है, इस युग में मनुष्य की अधिकतम आयु 100000 वर्ष होती है, वहीं लम्बाई लगभग 32 फीट होती है, इस युग का तीर्थ पुष्कर था, तथा इस युग में मानव मन में स्वार्थ नहीं था, इसी वजह से पाप की मात्रा शुन्य थी, इसी युग की  मुद्रा रत्न थी एवं बर्तन स्वर्ण के उपयोग में आते थे, इस युग में मानव रिश्ते सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त प्रेम एवं आध्यात्म पूर्ण थे, वहीं इस युग में भगवान प्राप्ति का जरिया ध्यान हुआ करता था, इसी युग में भगवान विष्णु के मत्स्य, हैग्रिव, कूर्म, वाराह, और नृसिंह अवतार भी हुए |

युगों के क्रम में दूसरा युग है वह त्रेता युग– इस युग की अवधि 1296000 वर्ष होती है, इस युग में मनुष्य की अधिकतम आयु 10000 वर्ष है, वहीं लम्बाई लगभग 21 फीट है, त्रेता युग का तीर्थ निमिश्यारण्य है, जो वर्तमान में लखनऊ के पास स्थित है, त्रेता युग मैं ही मानव मैं स्वार्थ की वृत्ति जागृत हुई और इस कारण से पाप शुरू हुए, इस युग मैं पाप की मात्रा 25% थी, इस युग की मुद्रा स्वर्ण थी, बर्तन चांदी के उपयोग में थे, इस युग में स्त्री और पुरुष के मिलन हेतु विवाह जैसे नियमों की नींव रखी गई, इस युग में भगवान प्राप्ति का जरिया यज्ञ था, त्रेता में ही भगवान विष्णु के पांचवें, छठे एवं सातवें अवतार यानि वामन, परशुराम एवं श्री राम ने जन्म लिया था |

तीसरा युग है द्वापर युग – इस युग की कालावधी 8 लाख 64 हजार वर्ष होती है, इस युग मैं मनुष्य की अधिकतम आयु 1000 वर्ष होती है, और लम्बाई लगभग 11 फुट होती है, तीर्थ कुरक्षेत्र है, और इस युग में पाप का परिमाण (Quantity) पुण्य के समकक्ष यानी 50% हो गया, इस युग की मुद्रा चांदी थी, एवं बर्तन तांबे के थे, इस युग में स्त्री और पुरुष के मिलन के पश्चात नारी शोषण, नारी अपमान की बातें शुरू हो चुकी थी | इसी युग मैं भगवान श्री कृष्णा अवतरित हुए थे |

युगों में चौथा और अंतिम युग है कलयुग – भारतीय खगोल शास्त्र के प्रसिद्ध ग्रंथ सूर्य सिद्धांत के अनुसार कलियुग की शुरुआत ईसा पूर्व 3102 वर्ष के फरवरी महीने की 18 तारीख को हुई थी | पुराणों में इसी तारीख का जिक्र श्री कृष्णा के वैकुण्ठ जाने के समय को लेकर भी होता है |

पुराणों में कलयुग के विषय में कहा गया है, कि इस युग में धर्म अपने एक पैर पर ही खड़ा रहेगा, कलि के अर्थ में एक शैतानी सोच की कल्पना है, जिसका प्रभाव इस युग के मानव मस्तिष्क पर हावी रहेगा, इस युग की कालावधी 432000 वर्ष है, इस युग में मनुष्य की अधिकतम आयु 100 वर्ष है, और लंबाई लगभग 5.5 फीट है, कलयुग का तीर्थ गंगा है, और इस युग मैं पाप की मात्रा 75% है, इस युग की मुद्रा चांदी है, एवं बर्तन तांबे के हैं, कल्कि पुराण में लिखा है, कि इस युग में महिलाओं के साथ दुष्कर्म बढ़ेंगे एवं स्त्री और पुरुष दोनों में ही स्वार्थ एवं गैर जिम्मेदारी के तत्व बहुत अधिक प्रमाण में होंगे |

इस युग मैं रिश्ते बनाने के लिए झूठ फरेब एवं धोखे का सहारा लिया जाएगा, इसीलिए शादी जैसे रिश्तो की आयु बहुत छोटी होगी, इस युग में भगवान प्राप्ति का जरिया भजन कीर्तन है, विष्णु पुराण के अनुसार कलयुग के अंतिम चरण में मनुष्य की औसत आयु घटकर केवल 15 वर्ष ही रह जाएगी, यहां आपको बता दूं कि फिलहाल तक कलयुग के 5121 वर्ष पूरे हो चुके हैं, और यहां पहुंचते पहुंचते एक आम भारतीय की बात करे तो औसत आयु 100 से 69 वर्ष हो चुकी है |

ऐसा कहा जाता है, कि कलयुग में पाप धीरे-धीरे इतना बढ़ जाएगा कि मानवता एवं धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु कल्कि अवतार में जन्म लेंगे | कल्कि पुराण के अनुसार भगवान कल्कि संबल नामक एक गांव में तपस्वी ब्राह्मण विश्नुयाषा के घर जन्म लेंगे, आपको यह बता दूँ कि वर्तमान में संभल नामक गांव उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित है |

कल्कि पुराण में लिखा गया है, कि भगवान राम की ही भांति कल्कि के भी तीन भाई होंगे और उनकी पत्नी का नाम पद्मा होगा  साथ ही इस बात का भी जिक्र है की भगवान् कल्कि अपने कर्मो से धर्मं की स्थापना करेंगे और एक बार फिर धर्मं अपने चारो पैरो पर खड़ा हो जायेगा |

युगों की रहस्यमय जानकारी – लेख में बताई गयी जानकारी के आधार पर आपने अपने ज्ञान में भी बहुत सी नई चीजों को जोड़ा होगा यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो कृपया दूसरे लोगों के साथ भी शेयर कीजिएगा | कमेंट के जरिए आपके सुझाव जरूर हम तक पहुंचाइए  , धन्यवाद |

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